दीवाली और सोहन पापड़ी !

 


सोहन पापड़ी सबके घर आने लग गई होंगी। भई दीवाली तो सोहन पापड़ी के जायके के बिना अधूरी है वैसे ही जैसे गुजिया के जायके के बिना होली। 

सोहन पापड़ी के कई नाम;

सोहन पापड़ी को सोहन नाम उसके रंग से मिला है, जानकारों का मानना है कि सोहन पापड़ी के सोने (स्वर्ण) जैसे रंग के कारण ही उसे सोहन नाम मिला है।

जीभ में घुलने वाली परतदार पारंपरिक मिठाई के कई नाम हैं जो क्षेत्रीय और स्थानीय बोली/भाषाओं में अलग-अलग है- 

1. पतीसा 

2. सोहन पापड़ी

3. सोहन हलवा

4. पटका

5. शक्कर पारा

6. सोहन बर्फ़ी

7. पत्तर पापड़ी

8. सोहन पट्टी

9. सफेद पापड़ी

10. फ्लैक पापड़ी

(सोहन नाम का उच्चारण भी अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न है जैसे; सोन या सोम)




सोहन पापड़ी का इतिहास;

दुनियाभर में आदमी एक जगह से दूसरी जगह बसने जाते हैं। यह सिलसिला पुराकाल से चला आ रहा है और अपनी भाषा, संस्कृति, परम्परा और खान-पान को भी अपने में ले जाता है। जहां-जहां वो जाता है वहां उसके साथ देशज मिलावट हो जाती है और एक नई चीज पैदा हो जाती है। कई नई चीजें इतनी खास बन जाती हैं कि सदियों तक जिंदा रहती है जैसे कि सोहन पापड़ी। सोहन पापड़ी की उत्पत्ति की सटीक जानकारियां तो किसी को ज्ञात ही नहीं है फिर भी स्वाद, बनावट और विधि को लेकर जो अनुमान लगाए जाते हैं आज उनके बारे में बात करते हैं

सोहन पापड़ी की उत्पत्ति पर खान-पान के विशेषज्ञों की राय है कि इसका उद्गम भारतीय उपमहाद्वीप का उत्तरी हिस्सा रहा होगा क्योंकि परतदार मिठाइयों का चलन इसी हिस्से में ज्यादा देखा जाता है। 

पाकशास्त्री और मानवविज्ञानी कुरुश एफ दलाल का मानना है कि सोहन पापड़ी एक फ़ारसी व्यंजन है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सोहन पापड़ी तुर्की के व्यंजन पिस्मानिये से काफी मिलता जुलता है। तो हो सकता है वहां से आयी हो या यहां से वहां गई हो।




सोहन पापड़ी और सोशल मीडिया के वायरल मीम्स;

सोहन पापड़ी की बात हो और उस पर बनने वाले वायरल मीम्स पर बात न हो तो चर्चा अधूरी ही माननी चाहिए, यह भी सोहन पापड़ी की ख्याति का एक हिस्सा है। दीवाली नज़दीक है तो आपके सोशल मीडिया पर भी सोहन पापड़ी को लेकर जोक्स और मीम्स आ रहे होंगे, आप भी चुटकी लेकर अपने सगे-संबंधियों-मित्रों को फारवर्ड कर रहे होंगे। दरअसल दीवाली पर बाजार सोहन पापड़ी से पट जाता है और भेंट स्वरूप इतनी दी जाने लगी कि लोग सोहन पापड़ी से तंग आने लगे हैं। लोगों के तंग आने का प्रमुख कारण यह है कि बाजार ने उत्पादकता को इतना बढ़ा दिया है कि वो कीमत में कम हो जाती है और क्वालिटी भी खराब हो जाती है। जिस कारण सोहन पापड़ी का मूल स्वाद बाजार की अंधी दौड़ में कहीं खो सा गया है। 

सोहन पापड़ी का मूल स्वाद बचा रहे इसी कामना के साथ आपको दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं। 

Comments

Anonymous said…
सोहन पापड़ी जिंदाबाद, शुभ दीपावली
शुभ दीपावली,,, बहुत बहुत धन्यवाद